रिपोर्ट मनप्रीत सिंग
रायपुर छत्तीसगढ़ विशेष : दुनियाभर में पहली बार एयरलान कंपनियां अब तक के सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही हैं. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के चलते बंद हुई एयरलाइन सर्विसेज की वजह से कंपनियों की रेवेन्यू में इस साल करीब 1 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने यह अनुमान लगाया है. बता दें कि COVID-19 की वजह दे दुनियाभर की विमान कंपनियों का संचालन पूरी तरह से ठप पड़ा है. सिडनी स्थिति CAPA सेंटर फॉर एविएशन ने पिछले हफ्ते ही अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि मई के बाद अधिकतर विमान कंपनियों खुद को दिवालिया घोषित कर सकती हैं.कातर एयरवेज के CEO अकबर अल बकर का कहना है कि संकट की यह घड़ी सबसे फिट खिलाड़ी को ही बचा पाएगी.
किस एयरलाइंस पर सबसे अधिक खतरा?
कोरोना वायरस की तरह ही विमान कंपनियों को होने वाले नुकसान के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल है. इससे हर देश की विमान कंपनियों पर असर पड़ रहा है. एयरक्राफ्ट बनाने और उनकी सप्लाई करने वाली कंपनियां संकट की स्थिति से गुजर रही हैं. बोईंग कॉरपोरेशन (Boeing Co.) ने पहले ही सरकार से मदद की गुहार लगाई है. वहीं, एयरबस (Airbus SE) भी अपने क्रेडिट लाइंस को बढ़ा रही और डिविडेंट कैंसिल करने में लगी है.
एशियाई कंपनियों की हालत खराब
ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि एशियाई विमान कंपनियों के लिए यह सबसे अधिक संकट की स्थिति है, क्योंकि इनपर सबसे अधिक कर्ज है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यूरोपीय विमान कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कई देश की सरकारें विमान कंपनियों से वित्तीय सहायता के लिए बात कर रही हैं.
भारत की इन दोनों कंपनियां पर संकट का खतरा नहीं
हालांकि, भारत की घरेलू विमान कंपनी स्पाइसजेट लिमिटेड ने कहा कि फिलहाल उसकी स्थिति फेल होने की नहीं है. कंपनी के पास पर्याप्त कैश फ्लो है वायरस के बाद डिमांड में इजाफा होने की उम्मीद भी है. इंटरग्लोब एविएशन की इंडिगो ने कहा कि उसके कैश फ्लो एक साल के लिए पर्याप्त है. कंपनी ने कहा कि अगर उसका विमान अगले एक साल तक भी ग्राउंडेड रहते हैं तो इससे निपटने के लिए उसके पास पर्याप्त पैसा है.