जिला अस्पताल में आठ साल के बच्चे की मौत, कोरोना रिपोर्ट आने से पहले डॉक्टरों ने शव देने से किया इनकार


Report manpreet singh 


Raipur chhattisgarh VISHESH :जिला अस्पताल में आठ साल के बच्चे की मौत, कोरोना रिपोर्ट आने से पहले डॉक्टरों ने शव देने से किया इनकार, जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे 8 साल के एक बच्चे की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। इस मौत को लेकर डॉक्टर आशंकित है। बच्चे की मौत होते ही अस्पताल प्रशासन एहतियात बरते हुए शव को मॉरच्यूरी पहुंचाया। 


 कोरोना के बढ़ते ग्राफ से मौत को लेकर भी भ्रम की स्थिति है। सोमवार को जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे 8 साल के एक बच्चे की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। इस मौत को लेकर डॉक्टर आशंकित है। बच्चे की मौत होते ही अस्पताल प्रशासन एहतियात बरते हुए शव को मॉरच्यूरी पहुंचाया। सैंपल कलेक्ट कर जांच के लिए आरटीपीसीआर किट को रायपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया। रामनगर आजाद चौक भिलाई निवासी शाहिद अली (8) को उपचार के लिए 10.15 बजे जिला अस्पताल लाया। उसे चिल्ड्रिन वार्ड में भर्ती कराया गया। तब उसे सांस लेने में तकलीफ थी। डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन दो घंटे बाद शाहिद की सांसे थम गई।


समझाने पर माने परिजन


परिजनों की हुई काउंसलिंग के बाद डॉक्टरों ने आशंका जाहिर किया कि सांस मे तकलीफ की वजह कोरोना वायरस तो नहीं? सिविल सर्जन और अन्य डॉक्टरों के आपसी परामर्श के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव का फ्रिज करने का निर्णय और सैंपल कलेक्ट कर उसे जांच के लिए रायपुर भेजा गया।


जांच में विलंब न हो अलग से भेजा सैंपल


जिला अस्पताल के अधिकारियों ने इस प्रकरण को संवेदनशील माना है। सिविल सर्जन डॉ. पी बालकिशोर के निर्देश पर सैंपल को अलग बाक्स में रखा गया। बाक्स के ऊपर लाल पेन से अनिवार्य लिखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि सैंपल जांच प्राथमिकता से करने से लिए वे टैलीफोनिक चर्चा भी की गई है।


दो दिन पहले मुंह में हुआ था छाला


मृतक बच्चे के पिता हैदर अली के मुताबिक शाहिद को दो दिन पहले मुंह में छाले की शिकायत हुई थी। वह कुछ खा नहीं रहा था। डॉक्टर को दिखाने के बाद उसे दवाई भी दी थी। ठीक नहीं होने पर वह डॉक्टर को दिखाने के लिए जिला अस्पताल लाने का मन बनाया था। सुबह अस्पताल आने से पहले नहाने कहा गया। नहाते समय ही उसे सांस लेने में तकलीफ हुई और बेहोशी की हालत में पहुंच गया।


पूछताछ में परिजनों ने बताया कि वे मोहल्ले से बाहर निकले ही नहीं है। उनके वार्ड में अब तक कोई कोरोना पॉजिटिव भी नहीं है। एहतियात के तौर पर वे बच्चों पर विशेष नजर रख रहे है। उनके यहां कोई बाहर जिला व प्रदेश से मेहमान भी नहीं आया है। परिजन कोरोना जांच के पक्ष में नहीं थे। उनका कहना था कि जांच रिपोर्ट आने में 10 से 15 दिन का समय लगता है। तब तक वे अपने बच्चे के शव को मरच्यूरी में नहीं रख सकते। समझाइश के बाद वे तैयार हुए।


इसलिए एहतियात मृतकों की जांच में 2 की रिपोर्ट आई थी पॉजिटिव 


1. अप्रैल में जिला अस्पताल में उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई थी। जिसका सैंपल लिया गया रिपोर्ट निगेटिव आया।


2. अप्रैल में ही सुपेला अस्पताल में महिला की मौत हुई। रिपोर्ट निगेटिवि आया।


3. मई में हुडको निवासी वृद्ध महिला की रायपुर अस्पताल में मौत हुई। रिपोर्ट निगेटिव आया।


4.मई में ही बीएमशाह अस्पताल में महिला की मौत हुई। रिपोर्ट निगेटिव आया।


5. मई में ही अंजोरा-नेहरुनगर बायपास में मुबंई से झारखंड जा रहे युवक की मौत हुई। रिपोर्ट निगेटिव आया।


6. मई मे ही प्राइवेट गाड़ी से मुबंई से परगना पश्चिम बंगाल जा रहे युवक की रास्ते में मौत हो गई। जांच में मृतक के अलावा दो लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिले।


7.चरोदा निवासी महिला की मौत उपचार से पहले रायपुर में हो गई। सैंपल लिया गया। रिपोर्ट पॉजिटिव आया।


नए कंटेंनमेंट जोन किए घोषित 


नए कोविड-19 पेशेंट मिलने के बाद जिले में 5 नए कंटेनमेंट जोन घोषित किए गए हैं। इनमें भिलाई के नेवई भाठा, पुलगांव के महेश कॉलोनी, वार्ड 19 कैंप-1 भिलाई, सतनामी पारा जागृति विद्यालय के पास वार्ड-28 छावनी व सेक्टर-6 सी मार्केट नगर शामिल है। कंटेनमेंट जोन में मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर सभी तरह की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगा। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने कहा है कि कंटेनमेंट जोन के रूप में चिन्हांकित क्षेत्र के दायरे में शामिल सभी दुकानें और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। प्रभारी अधिकारी द्वारा कंटेनमेंट जोन में घर पहुंच सेवा के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जाएगी। कंटेनमेंट जोन में सभी प्रकार के वाहनों के आवागमन पर प्रतिबन्ध रहेगा। मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर अन्य किन्ही भी कारणों से घर से बाहर निकलना प्रतिबंधित रहेगा। कन्टेनमेंट जोन की निगरानी पुलिस पेट्रोलिंग टीम द्वारा की जाएगी। जिला चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा सम्बंधित क्षेत्र में स्वास्थ्य की निगरानी में लोगों के सैंपल लिए जाएंगे।


फ्रिजर में सुरक्षित रखा सैंपल 


एम्स और मेडिकल कॉलेज द्वारा जांच के लिए सैंपल लेने से इंकार करने पर स्वास्थ्य विभाग के सामने सामस्या आ गई है। सोमवार को 115 सैंपल लिए गए है। जिसे स्टोर के फ्रिजर में सुरक्षित रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग उच्च अधिकारियों से चर्चा करने के बाद सैंपल को जगदलपुर मेडिकल कॉलेज भेजने की तैयारी कर रहा है। मेडिकल कॉलेज ने सोमवार को कोविड-19 हॉस्पिटल की पहली भर्तीमरीज का सेकेण्ड टेस्ट रिपोर्ट जारी किया है। जिसमें युवती को निगेटिव होना बताया है।


क्वारंटाइन अवधि में लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। क्वारंटाइन सेंटर से गायब होने अथवा लापरवाही बरते जाने पर अब संबंधितों के खिलाफ जिला प्रशासन पुलिस में एफआईआर दर्ज कराएगी। ऐसा हुआ तो संबंधित को छह महीने की सजा अथवा एक हजार रुपए जुर्माना या दोनों भुगतना पड़ सकता है।


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