बिक गया बिग बाजार, कैसे कर्ज में डूबते गए रिटेल किंग किशोर बियानी!


Report manpreet singh 


RAIPUR chhattisgarh VISHESH : नई दिल्ली  , कर्ज में डूबी और दिवालिया होने की कगार पर खड़ी फ्यूचर ग्रुप को रिलायंस रीटेल ने संजीवनी दी है। शनिवार को रिलायंस रीटेल ने 24,713 करोड़ में फ्यूचर ग्रुप का अधिग्रहण कर लिया। फ्यूचर ग्रुप में हजारों लोग नौकरी करते हैं और सप्लाई चेन से भी हजारों लोग जुड़े हुए हैं। कर्ज ना चुकाने पाने की हालत में कंपनी पर ताला लगने की आशंका गहराती जा रही थी। बता दें कि पूरे देश में बिग बाजार के 295 स्टोर्स हैं। इसमें हजारों लोग काम करते हैं। इस डील के बाद सभी की नौकरी सुरक्षित है।


छब्बीस साल की उम्र में फ्यूचर ग्रुप के संस्थापक किशोर बियानी ने पहला पहला स्टोर पैंटालून के नाम से खोला था। तब किसी ने नही सोचा था कि किशोर बियानी को रीटेल सेक्टर के गॉड फादर का तमगा मिलेगा और ना ही किसी ने यह सोचा था कि उनकी कंपनी यानी फ्यूचर ग्रुप कर्ज में इतना डूब जाएगी कि वह कर्ज का ब्याज चुकाने में भी असमर्थ हो जाएगी। कंपनी पेमेंट में डिफॉल्ट करने लगी थी। फ्यूचर ग्रुप पर कर्ज का संकट इतना विकट था कि उसे इस बात से समझा जा सकता है कि कंपनी को फॉरन बॉन्ड्स पर 100 करोड़ का ब्याज चुकाना था जिसे कंपनी ग्रेस पीरियड खत्म होने के आखिरी दिन ही चुका सकी।


कोरोना ने कंपनी की वित्तीय हालत को और बिगाड़ दिया। लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर स्टोर्स को बंद करना पड़ा। फ्यूचर ग्रुप के सभी तरह के स्टोर्स की संख्या 1650 से भी अधिक है और हजारों लाखों लोग इससे प्रत्यक्ष अप्रत्क्ष रूप से जुड़े हैं। कर्ज बढ़ने से कंपनी के डूबने के खतरे के बीच कर्मचारियों को भी अपनी नौकरी की चिंता सता रही थी। रिलायंस रीटेल के निवेश ने कंपनी को उसके दुर्दिनों से उबार लिया है।


सवाल यह है कि अधिग्रहण के बाद फ्यूचर ग्रुप के बिग बाजार व अन्य ब्रांड्स का क्या होगा। क्या उनका नाम भी बदल दिया जाएगा। तो इसका जवाब खुद रिलायंस रीटेल वेंचर्स लिमिटेड की निदेशक ईशा अंबानी ने दिया है। डील पर खुशी जाहिर करते हुए ईशा अंबानी ने कहा कि ” फ्यूचर ग्रुप के प्रसिद्ध ब्रांडों के साथ-साथ उसके व्यावसायिक ईको सिस्टम को संरक्षित करने में हमें प्रसन्नता होगी। भारत में आधुनिक रीटेल के विकास में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमे आशा है कि छोटे व्यापारियों, किराना स्टोर्स और बड़े उपभोक्ता ब्रांडों की सहभागिता के दम पर रीटेल सेक्टर में विकास की गति बनी रहेगी, हम देश भर में अपने उपभोक्ताओं को बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”


शहरी उभोक्ताओं के लिए बिग बाजार वर्षों से रोजमर्रा के सामान की पूर्ति का केंद्र रहा है। बिग बाजार सरीखी चेन्स में रिलायंस रीटेल का पेशेवर रवैया जरूर देखने को मिल सकता है पर ईशा अंबानी के बयान के बाद यह तो तय है कि रिलायंस बिग बाजार की रीब्रांडिंग नही करने जा रहा इसलिए उपभोक्ताओं के लिए बिग बाजार में कुछ भी नहीं बदलेगा।


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